Type Here to Get Search Results !

प्रधानमंत्री के बयान को आम जनता का अपमान : राव

 प्रधानमंत्री के बयान को आम जनता का अपमान : राव



बेतिया::-बिहार राज्य किसान सभा के संयुक्त मंत्री प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि कल राज्यसभा में जिस तरीके से देश के प्रधानमंत्री देश के अन्नदाताओं के संदर्भ में जो पूरे देश को भोजन देता है ,  जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है , वह निश्चय ही इस देश की अन्नदाता और आम जनता का अपमान है । उन्होंने किसान आंदोलनकारियों को आंदोलन जीवी कहा । जिन  शब्दों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने किया है , कहीं ना कहीं उनके और उनके संघ पक्षीय लोगों के लिए ही यह शब्द बनता है।  देश के कारपोरेट घरानों का दलाली करने वाले , उनके पैसे पर जीने वाले परजीवी आज आंदोलन जैसे पाक शब्द जो इतिहास इस बात की साक्षी है धरती इस बात की गवाही है कि दुनिया में जब भी , जहां भी दमन और आतंक के खिलाफ , हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठा है । तो उसे आंदोलन कहा गया है । यह आंदोलन हमें गोरी हुकूमत को इस देश से परास्त करने का काम किया है । यह आंदोलन जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में अधिनायकवादी शक्तियों से देश को बचाने का काम किया है और उसी की उपज उसी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के गर्व से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे लोग हैं।  आज इनको गद्दी अगर नसीब हुई है तो चलने वाले आंदोलन से हुई है । अब ये सत्ता पाकर उस आंदोलन को गाली देने का काम कर रहे हैं  ।उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व जो कारपोरेट जगत के पैसों पर पलते हैं । जो युवाओं के खिलाफ काम करते हैं । जो किसान विरोधी कानून को समाप्त नहीं करना चाहते हैं । जो अडानी , अंबानी जैसे देश के लुटेरों को देश की सारी संपत्ति के साथ साथ जमीन भी दे देना चाहते हैं । जो अमेरिका के राष्ट्रपति जो वाइडन द्वारा समर्थित अपनी किसान विरोधी काले कानूनों का डिधोरा पूरे दुनिया में पीट रहे हैं । 

         यह सर्व विदित है कि अमरीकी साम्राज्यवाद से बड़ा लूटेरा इस दुनिया में दूसरा कोई नहीं है । वह अपने स्वार्थ के अलावा दूसरे किसी भी देश का स्वार्थ को नहीं समझता है । बावजूद इसके , उसको अपना आका समझने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस बात की हिमायती बने हुए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कृषि कानून का समर्थन करने मात्र से वह सही हो जाता है । जबकि दुनिया के तमाम देशों में किसानों के बेटे जो वहां रहते हैं , उन लोगों ने किसान विरोधी काले कानूनों का विरोध किया है । तो यह उसे विदेशी हस्तक्षेप समझते हैं । जबकि सच्चाई यह है कि इन्होंने दुनिया के देशों में हाउडी कराया , देश की जनता की गाढ़ी कमाई से वहां के भारतीय मूल के लोगों  और भारत से भागे हुए भारतीय  लोगों को बुलाकर बड़ी-बड़ी सभाएं कराई और उसे देश का मान और सम्मान बताया । जो कि सिर्फ अपने प्रतिभा को ही उजागर करने का काम कर रहे थे । इसलिए आज हम कहना चाहते हैं कि आंदोलन को नापाक करने से बाज आएं और अदानी अंबानी के पैसे पर जीने वाले , देश की जनता का पैसा का दुरुपयोग करने वाले, देश के तमाम सार्वजनिक  क्षेत्र के संपत्ति को बेच देने वाले प्रधानमंत्री आंदोलन को गाली देना बंद करें और किसानों के विरुद्ध जो काले कानून है उसे वापस करें अन्यथा  संभव है कि नरेंद्र मोदी की सरकार को भी यह आंदोलन कहीं बदल न दे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.