*हमें इथनौल मिल नहीं चीनी मिल चाहिए*
बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभु राज नारायण राव ने बिहार सरकार से चीनी मिलों पर किसानों के बकाए का भुगतान ब्याज सहित अबिलंब कराने को कहा है । उन्होंने ने कहा कि बिहार के 29 चीनी मिलों में से मात्र 11 चीनी मिलें चालू है । जिसमें से 16 बन्द चीनी मिलें बिहार सुगर कार्पोरेशन के अधीन है । जो बिहार सरकार के उद्योग के प्रति नकारात्मक इच्छा शक्ति को ही दर्शाता है। बिहार में कृषि आधारित चीनी मिल ही मुख्य उद्योग है । अगर सभी चीनी मिलों को चालू कर दिया जाय , तो पूरे बिहार में गन्ना जैसे नगदी फसल किसानों द्वारा लगाया जाता । जिसमें बाढ़ से लड़ने की भी छमता है ।
बिहार के उप मुख्यमंत्री रेणु देवी द्वारा यह कहना कि बन्द पड़े चीनी मिलों में इथनॉल बनाया जाएगा । यह बिहार के किसानों के साथ धोखा है । बिहार सरकार चाहती है कि केंद्र द्वारा लाए गए किसान विरोधी तीनों कानूनों को बिहार में लागू करना और चीनी मिलों के लिए जो जमीन किसानों ने दी है , उस जमीन पर इथनौल का कारखाना बनाकर सरकार उन जमीनों को निजी हाथों से बेचना चाह रही है । यानी कि किसानों की जमीन कारपोरेट के हाथों बेचने और इथनॉल बनाकर व्यापार करने की योजना बनाई जा रही है । जबकि हम बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ की तरफ से साफ-साफ बिहार सरकार को बताना चाहते हैं कि बिहार के किसान अपनी जमीन चीनी मील बनाने के लिए दिए हुए हैं । इससे किसानों को लाभ मिल रहा था । लेकिन मिल मालिकों की किसान विरोधी कारवाइयों के चलते और सरकारी सहयोग किसानों को नहीं मिलने के चलते आज किसान जो नगदी फसल गन्ना को लगा रहे थे । उस नगदी फसल से चीनी मिल के अभाव में अधिकांश बिहार आज बंचित हो गया है। हम कहना चाहते हैं की चीनी मिलों की जमीन किसानों की है उस पर चीनी मिल लगाकर किसानों का विकास की गारंटी सरकार करे ।
गन्ना से चीनी उत्पादन के बाद गन्ना के बाई प्रोडेकट उत्पादन जैसे बिजली , इथनॉल , प्रेसमड , बगास जैसे उत्पादित हिस्से से हुए मुनाफे का आधा हिस्सा किसानों को दिया जाय ।
अन्यथा बन्द पड़े चीनी मिलों कि किसानों की जमीन किसानों के हाथ लौटा दी जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार के खिलाफ और किसान विरोधी करवाई के विरुद्ध आन्दोलन खड़ा किया जाएगा ।
प्रभुराज नारायण राव
महासचिव
बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ

