*बिहार के किसान 29दिसंबर को पटना में राज्यपाल को घेरेंगे*
संवाददाता , पटना से रंजीत कुमार।
पटना::- अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर 29 दिसंबर को बिहार के राज्यपाल के समक्ष बिहार के किसानों का विशाल प्रदर्शन पटना में किया जाएगा । इस प्रदर्शन की तैयारी के लिए बिहार राज्य किसान सभा अपने हर इकाइयों को निर्देश दिया है की ज्यादा से ज्यादा संख्या में 29 दिसंबर को पटना पहुंचकर राज्यपाल के समक्ष होने वाले प्रदर्शन को सफल बनावें। बिहार राज्य किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने बिहार के किसानों से आह्वान किया है कि जो किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन काले कानूनों के खिलाफ पूरी तरह उनकी वापसी के लिए दिल्ली को चारों तरफ से घेरे हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं उसमें से 2 दर्जन से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं। बड़ी संख्या में कई राज्यों के किसान इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली की तरफ कुच कर गए हैं। महाराष्ट्र किसान सभा के बहादुर साथी नासिक से अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले के नेतृत्व में दिल्ली कि और मार्च कर चुके हैं। यह आन्दोलन पूरे देश के किसानों का आंदोलन बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर किसानों के अंदर फूट डालने के काम के अलावा दूसरा कुछ नहीं कर रहे हैं। उनको किसानों के हित की कोई चिंता नहीं है। किसानों को लगातार बरगलाना और झूठ बोलने की हद को पार कर चुके हैं। जबकि किसान विरोधी काले कानूनों से स्पष्ट है की देश के बड़े कारपोरेट के हाथों किसानों की जमीन को बेचने की योजना बनाई जा चुकी है। 7 ई सी कानून को हटाकर जमाखोरों को आवश्यक सामग्री की जमाखोरी करने की पूरी छूट दी जा रही है । एक आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त कर और आवश्यक चीजों की कालाबाजारी करने की छूट न केवल देश के किसानों के लिए बल्कि देश की 84% जनता के लिए संकट की स्थिति है। ऐसी परिस्थिति में केंद्र सरकार अपने केंद्रीय मंत्री और अनेकों राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को अपने अपने क्षेत्रों में भेज कर कृषि सम्मेलन का आयोजन कर इस कृषि विरोधी काले कानून के पक्ष में जनमत बनाने के प्रयास में लगी हुई है। दिल्ली को घेरे हुए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के किसान न केवल इस बात को महसूस कर रहे हैं बल्कि देश के सारे किसान इनकी काला गुजरी को समझने लगे लगे हैं इसलिए 29 दिसंबर बिहार के राज्यपाल के समक्ष होने वाला यह प्रदर्शन मोदी सरकार को आगाह करेगा कि आप किसान विरोधी काले कानूनों को वापस ले ले अन्यथा बिहार से होने वाला आंदोलन इतिहास इस बात के साक्ष्य अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन हो चाहे वह कांग्रेसी के खिलाफ छात्र आंदोलन बेतिया से शुरू हुआ था और आंदोलन का सामने है अंग्रेजी हुकूमत इस देश से जाना पड़ा और इंदिरा गांधी की हुकूमत भी धराशाई हो गई थी इसलिए देश के प्रधानमंत्री को बिहार काया किसान आंदोलन चेतावनी देना चाहता है क्या आप बिहार के किसानों को बछड़े बल के किसान विरोधी काले कानूनों को अविलंब वापस ले लें । अन्यथा बिहार से शुरू होने वाला किसान आंदोलन आपकी सरकार के लिए मुसीबत बनकर सामने खड़ा हो जाएगा।


