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ऋषि कुल आश्रम संस्कृत महाविद्यालय बदहाली के कगार पर, जिम्मेदार कौन?

 ऋषि कुल आश्रम संस्कृत महाविद्यालय बदहाली के कगार पर, जिम्मेदार कौन?



भारतेंदु कुमार चन्दन

 *अरेराज,संग्रामपुर:* 


महर्षि योगानंद सरस्वती द्वारा स्थापित ऋषि कुल आश्रम संस्कृत महाविद्यालय अपने अस्तित्व को बचाने कि जद्दोजहद करता नजर आ रहा है। जर्जर भवन अपने बदहाली का  मंजर ब्या कर रहा है।। विगत 100वर्षो से भी अधिक समय से सनातन संस्कृति और संस्कृत ज्ञान इस विद्यालय से मिलता रहा है।


      सन 2013 मे नाटकीय तरिके से तदर्थ समिति गठन कर प्रध्यानाध्यापक पद एवं दो शिक्षकों कि नियुक्ति कि गइ। विश्व विद्यालय से सुचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज से नियुक्ति मे कइ सारी त्रुटि है। जैसे तृतीय श्रेणी एवं अनुभव प्रमाण पत्र से सम्बंधित ।

        शासी निकाय द्वारा इन नियुक्ति को निरस्त किया जा चुका है । विश्व विद्यालय के पत्र से यह ज्ञात होता है कि नियुक्ति विश्यक प्रस्ताव सिधे नियुक्त व्यक्तियों को  विश्वविद्यालय प्रशासन ने  समर्पित किया ।जिसमे अनेक त्रुटि है। जो विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार्य किया।

             शासी निकाय कमिटी द्वारा बार बार विश्वविद्यालय को पत्र द्वारा सुचित किया गया कि यहा किसी प्रकार नियुक्ति से सम्बंधित अभिलेख नही है। पुर्व प्रचार्य दिनेश मिश्रा द्वारा भेजे गये पत्र मे सुचित किया जा चुका है कि विगत 10वर्षो से इस महाविद्यालय मे कोइ नियुक्ति नही हुई है।

       इन सभी विषयों कि अंदेखी कर विश्वविद्यालय द्वारा 2018 (मइ) इसका अनुमोदन करवाना  विश्वविद्यालय प्रशासन पर कइ सवाल खड़ा करता है।

  ईन सारे विंदुओं को ध्यान मे रखते हुइ सम्बंधित अधिकारी,विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्यपाल को मोतिहारी जिले के संग्रामपुर ब्लाक स्थित इस धरोहर को बचाने मे आगे आना चाहिए।ताकि संस्थान का  अस्तित्व बचाया जा सके


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