बेगूसराय के युवा कवि कवि के द्वारा लिखा गया बेगूसराय पर अद्भुत कविता ,जिसमें बेगूसराय के बारे में वर्णन किया गया है ।।।।
संवाददाता गोविन्द कुमार। *बेगूसराय* अलशाया सा यह शहर, करवटें बदलने लगा है । धूल से सने जिस्म को , झाड़ पोछ उठ खड़ा होने को बेताब।। ..............….....................….. शरीर के अलग-अलग हिस्सों को, जोड़ने वाले रास्तों पर । सुबह-सुबह स्कूलों एवं कोचिंग संस्थानों के लिए भागम-भाग करते शिक्षक एवं बच्चे एवम उनके साथ-साथ स्कूटी पर दौड़ती - भागती लड़कियां ।। शहर अचानक ही जवान हो गया , जैसे उसने कॉस्मेटिक सर्जरी कराई हो......... दोपहर होते-होते शहर के हर चौक-चौराहे पर जाम का अद्भुत संगम शहर के हर मोड़ पर ई-रिक्शा, रिक्शा और ठेले वाले का अद्भुत संगम ।।।।।.।। इन सबो के बीच में बेचारे फंसे स्कूली बच्चे और आम व्यक्ति घंटों मशक्कत के बाद जाम से मिलता छुटकारा मानो जैसे कोई जंग जीत लिया हो ।।। यह बेगूसराय है बेगूसराय जिले में पांच अंगिभूत महाविद्यालय है, और बेगूसराय संग्रहालय भी है राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जन्मभूमि है, स्टेशन के दोनों ओर फ्लाईओवर का होना एक अद्भुत एहसास कराता है यहां बरौनी रिफाइनरी, फर्टिलाइजर, थर्मल पावर स्टेशन जैसे प्रमुख कारखाने हैं ।।।।।।।। जबकि सिमरिया (पुल- घाट), कावर पक्षी विहार, जयमंगला गढ़, हरिगिरीधाम, नौलखा मंदिर, नमक सत्याग्रह स्थल जैसे पावन दर्शनीय स्थल भी हैं जो पूरे जिले वासियों को गौरवान्वित महसूस कराती है।। बस एक ही चीज की कमी है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय बेगूसराय अनुराग कुमार युवा कवि बेगूसराय ( बिहार)


