*सफदर हाशमी के शहादत दिवस पर*
अब समझा
तेरे होंठों पर मुस्कान का मतलब
कि तुम आज़ाद हो
अपने वजूद कि हिफाजत के लिए
तुम्हारे जम्हूरी फसाने
वतन की रखवाली
मुफलिसी बेवासी पे
सैदा होने की बात
ये और कुछ नहीं
महज छलावे हैं
मैनें जब भी इस मुल्क
की तरक्की मांगी
जागो , जब भी आवाम को
आवाज़ दी
वैसे हर एक अल्फ़ाज़
तुम्हें रंज किए
अब मैं कह दूंगा
उन सारे तबाह रूहों से
जिनकी तबाही की तहरीर
बन गए हो तुम
जमीं से तेरा भी अब
पांव उखड़ने वाला है
इस मुल्क की जंजीर
बन गए हो तुम
मेरा सफदर
इस जहां में अब नहीं रहा
उसकी सदा मगर
हर तरफ से आती है
तुमने खुद की खातिर
उसको मुझसे छीन लिया
वह खून हमें चिंख कर
बुलाती है
कुछ ऐसा करो की ये
तख्त वो ताज चुर हो जाय
और मुफलिसी हमेशा के लिए
दूर हो जाय .......
प्रभुराज नारायण राव



