आलेख - मीसा यादव
सैंटा क्लाज़ की भांति हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया - मीसा
आज उन विराट अस्तित्व एवं अलंकृत व्यक्तित्व का जन्मदिवस है। जिनके
छांवो तले मैं पली-बढ़ी ' पढ़ी ही नहीं बल्कि अपने जैसे हजारों पंखों को उड़ान भरने जैसी किरदार की भूमिका अदा करने - कराने वाले छवि भी निखरते देखते रही। बेशक ' आप जैसे पापा की बेटी होने का गौरव मुझे प्राप्त हुआ। परंतु अवसरों के दौर में हूबहू मेरे स्वरूप ही आवाम की बेटे- बेटियों को भी प्रखरता प्राप्त की चेष्टा आप मे देख ' मेरे जीवनकाल में हर पल उत्सव का माहौल प्रदर्शित होते चला गया। आप वह ढाल रहे है जो तमाम विकट परिस्थितियों का मुकाबला सशक्ता के साथ करते हुए एक सैंटा क्लाज़ की भांति हमारी हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
प्रिय पापा को दुनिया के सबसे महान एवं जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। सियासत के क्षेत्र में रहकर भी आवामों के संकटो को जिस स्वरूप आपने अपनी संकट समझ निराकारण करते करते अपनी आधी से अधिक उम्र खर्च डाला। ऐसे में समाज को आप जैसे अच्छे पिता की हमेशा जरूरत है।समाज एवं मेरी नजरों में हमेशा अलग व सर्वोच्च ओहदा है पापा आप।
जीवन में काफी लगाव, प्रेम और आपके प्रति सम्मान रहा। संकोच की सीमाओं के बीच कभी शब्दों के जरिए जता या बता नहीं पाई, लेकिन आज जब सोच रही थी कि जन्मदिन के इस विशेष मौके पर आपको उपहार क्या दूं ? तो सोचा कि जिस पिता ने मुझे काबिल बनाने और हमेशा खुश रखने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उनके लिए शायद किसी उपहार से ज्यादा संतान की उनके प्रति प्रेम और भावनाओं की अभिव्यक्ति अनमोल होगी। इसीलिए मैं अपनी अमूल्य भावनाएं, जो सिर्फ आपके लिए हैं, उन्हें व्यक्त कर रही हूं। पापा, एक बेटी होने के नाते हमेशा से ही मेरा झुकाव आपकी तरफ अधिक रहा है और आज भी मां से ज्यादा आपसे ज्यादा बनती - बैठती है मेरी। जब भी मां बचपन में डांटती तो आप अपने पास बुलाकर बेटों से भी अधिक ढांढस बंधाकर रोते रोते हंसना सीखो के दिशा में परिवर्तित करते रहे। जिद्द के जहन में या मर्जी की मतंग में हर मांगे मेरी आपने पूरा किया। साथ ही हर छोटी-बड़ी उपलब्धि पर मेरा उत्साह बढ़ाते रहे। शायद ' आपके इन्हीं किरदारों ने जीवन के किसी भी कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों में मेरे किन्हीं भी सोंच से खुद को इतर नही रखा। फिलहाल तो शैक्षणिक शिक्षा के क्षेत्र में ही' मैं संघर्ष संग दुगने आत्मविश्वास के साथ खड़ी हूँ। साथ ही कदम से कदम मिलाकर अपनी शैक्षणिक संघर्ष जारी रखते हुए " बचे हुए सारे पल आपके जोड़ को गठजोड़ बनाने को लगाने हेतु मैं प्रतिबद्ध हूँ। वर्तमान समय कितना भी विपरीत हो , चाहे कोई साथ खड़ा हो न हो। कटिबद्ध हूँ कि हर पल आपके उन्नत सोंच के साथ खड़ी रहूँ। ऐसे में दुनिया की कोई ताकत आपको डिगा नहीं सकेगी।
पापा की बेटी ने पापा से अधिक खुद को कभी नहीं आंका। आप क्या हो मेरे लिए, इसका वर्णन करना असंभव है। लेकिन आप क्यों हो मेरे लिए ? इसका जवाब केवल इस बात तक सिमटता है कि - 'आप एक पिता हो और मैं आपकी राजकुमारी। 'कहने को बहुत कम हैं ये शब्द, लेकिन फिर भी, शुक्रिया पापा " मेरे पिता होने के लिए........ अशेष शुभकामनाएं पापा को इस विशेष मौके पर ' आजीवन आपके स्वस्थ स्वास्थ्य एवं संपूर्ण जीवन ' परिवार व समाज के प्रति सद्भावना के प्रतीक बने रहने की कामना करती हूँ।
आलेख ____मीसा

