*29 दिसंबर को पटना चलो। काले कृषि कानूनों को वापस लो* *कृषि का कारपोरेटी करण बन्द करों*
*29 दिसम्बर को किसानों का राजभवन घेराव!*
संवाददाता ठाकुर वरुण कुमार
पटना::- बिहार राज्य किसान सभा के राज्य अध्यक्ष ललन चौधरी ने निम्नलिखित प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुये कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे जहरीले प्रचारों का जवाब देते हुए लाखों किसानों ने कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली को घेर रखा है। पूरे देश के 500 किसान संगठनों कें अलावे देश भर की जनतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष शक्तियाँ किसानों के आन्दोलन के साथ एकजूट खड़ी है।
इस बीच राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता सुशील मोदी ने बिहार में ए.पी.एम.सी कानून के खत्म होने के बाद किसानों में खुसहाली का जिक्र कर अपनी सरकार का पीठ थपथपाने और बिहार के किसानों की जखमों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
वर्ष 2006 में बिहार में ए.पी.एम.सी कानून के खात्मे के बाद बिहार के किसान अपने उत्पादित अनाजों को औने पौने दाम पर बेचने के लिये अभिशप्त हैं।
समस्तीपुर एवं मुजफरपुर से सब्जी उत्पादकों की जो तस्वीर आई है वे इस बात की पुष्टि करती है कि किसानों को बेसहारा छोड़ दिया गया है। आज धान की सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है। और किसान उसे 900 एवं 1000 प्रति क्विंटल बेचने के लिये मजबूर है।
बिहार के सभी तबकों के किसान पूरी तरह दिल्ली में शहीद एवं संघर्षरत किसानों के साथ है और लगातार प्रदर्शनों, धरनों, पथों को रोककर अपने रोष का इजहार कर रहे है।
आगामी 29 दिसंबर को हजारों किसान पटना में राजभवन का घेराव करेंगे और अगर सरकार किसानों की नही सुनती है तो पूरे राज्य का चक्का जाम किया जायगा।


