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जांच की बात-जांच की बात-सिर्फ जांच की बात, कारबाई नदारद, अब डीडीसी ने बनाया जांच टीम - सुरेन्द्र

 * जांच की बात-जांच की बात-सिर्फ जांच की बात, कारबाई नदारद, अब डीडीसी ने बनाया जांच टीम - सुरेन्द्र


* पांडे पोखर फर्जीवाड़ा का एफआईआर दर्ज होने तक चलेगा आंदोलन- आशिफ होदा

* बीडीओ, सीओ, थानाध्यक्ष, एडीएम से वार्ता विफल- बंदना सिंह


ताजपुर 20 दिसंबर '20

पानी भरा पांडे पोखर में मिट्टी उड़ाही के नाम पर 9 लाख रूपये फर्जीवाड़ा की जांच कर एफआईआर दर्ज करने का शिकायती पत्र बीडीओ, सीओ, डीडीसी को देने के बाद तमाम अधिकारी माले प्रतिनिधिमंडल को सिर्फ  जांच का आश्वासन देते रहे जबकी फर्जीवाड़ा साबित करने के लिए मनरेगा का मास्टर राल, राशि निकासी सूची, कार्यस्थल पर प्राकलन का बोर्ड नहीं होना एवं प्रखण्ड मुख्यालय से आधे आघे किलोमीटर की दूरी पर स्थित भरा पोखर ही काफी है. पहले थानाध्यक्ष, सीओ की उपस्थिति में बीडीओ ने तीन सदस्यीये जांच टीम का गठन कर आरोपी मनरेगा पीओ, जेई आदि को ही टीम सदस्य बना डाला. माले द्वारा आपत्ति जताने पर बीडीओ मनोज कुमार ने मामले को लेकर डीडीसी से पहल करने की मांग की. इस बीच बीडीओ के बुलावे पर आए थानाध्यक्ष शंभुनाथ सिंह, सीओ सीमा रानी एवं एडीएम गौरव कुमार द्वारा भी 7 दिनों में जांच कर कारबाई करने के आश्वासन को भी माले कार्यकर्ताओं ने मानने से इनकार कर दिया. अब डीडीसी ने तीन सदस्यीये टीम गठित कर 7 दिनों के अंदर जांच कर कारबाई करने का पत्र भेजा है. इसी बीच भीषण ठंडा के बीच प्रखण्ड पर 16 दिसंबर से शुरू  घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन 5 वें दिन भी जारी रहा. मौके पर माले प्रखण्ड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया. आशिफ होदा, बंदना सिंह, नौशाद तौहीदी, ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, मो० गुलाब, बासुदेव राय, संजय शर्मा, मो० एजाज, मो० सदीक, अरशद कमाल बबलू, शंकर सिंह, मनोज साह, मुकेश कुमार गुप्ता, मनोज कुमार सिंह, अनीता देवी, नीलम देवी, सोनिया देवी, चांदबाबू, मो० लालबाबू, मो० सदीक, मो० परवेज आदि ने सभा को संबोधित करते हुए नीतीश सरकार को भ्रष्टाचारियों का संरक्षक सरकार बताते हुए एफआईआर होने तक आंदोलन जारी रखने का घोषणा किया. मौके पर दिल्ली किसान आंदोलन में शहीद किसानों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. मृतक किसानों को दो मिनट का मौन श्रद्धांजलि देते हुए किसानहित में तीनों कृषि कानून एवं बिजली विधेयक 2020 वापस लेने की मांग की गई.

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